Top 10 poem in hindi. Top 10 Best and Greatest Hindi Poets in India Ever 2019-08-31

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Hindi Poems (हिंदी कविताएं / Poetry)

top 10 poem in hindi

काले बादल के गरज पे नाचती, बूँदों की बारात को… एक बच्चा मुझसे निकालकर भागा था भीगने बाहर… रोका बड़प्पन ने मेरे, पकड़ के उसके हाथ को…! मंज़िल दूर नहीं है। - मैथिलीशरण गुप्त Mathilishran Gupt बुलाता है किसे हरे हरे, वह प्रभु है अथवा दास? Munder ki bulbul, haske ud jaeo…. भौम राज्य वह, उच्च भवन, चार, वंदीजन; - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल प्यार! Then this subsequently became a custom and on every Independence Day, Indian Prime Minister hoists the national flag and addresses the nation. वो था सुभाष, वो था सुभाष! हम न किसी का चाहते तनिक, अहित, अपकार प्रेमी सकल जहान का भारतवर्ष उदार सत्य न्याय के हेतु, फहर फहर ओ केतु हम विरचेंगे देश-देश के बीच मिलन का सेतु पवित्र सौम्य, शांति की शिखा, नमो, नमो! सब तुम क्या इसने पौरुषहीन? सर के बल खड़े हुए होते हिंदी के इतने लेखक-कवि? Madan Mohan Malveeya,1,Rabindranath Tagore,25,Rafi Ahmad Rafi,1,Raghuram Rajan,1,Raheem,3,Rahim Ke Done,3,Raja Bhoj,31,Ram Prasad Bismil,4,Ramcharit Manas,1,Ramdhari Singh Dinkar,17,RashmiRathi,7,Ratan Tata,1,Religion,1,Reviews,1,RigVeda,1,Rishabh Gupta,1,Robin Sharma,7,Sachin A. Human love is beautifully depicted in the poem. . .

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First episode of this show covered the life and poetic journey of famous hindi poet Ramdhari Singh Dinkar. इसके बारे में बहुत से लोगों की जिज्ञासा है और वे समय-समय पर यह प्रश्न पूछते रहते हैं। - रोहित कुमार 'हैप्पी' डॉ० कलाम को समर्पित. . सभ्य हुआ अब विश्व, सभ्य धरणी का जीवन, आज खुले भारत के संग भू के जड़ बंधन! पा जाता तब, हाय, न इतनी प्यारी लगती मधुशाला।।९९। साकी के पास है तिनक सी श्री, सुख, संपित की हाला, सब जग है पीने को आतुर ले ले किस्मत का प्याला, रेल ठेल कुछ आगे बढ़ते, बहुतेरे दबकर मरते, जीवन का संघर्ष नहीं है, भीड़ भरी है मधुशाला।।१००। साकी, जब है पास तुम्हारे इतनी थोड़ी सी हाला, क्यों पीने की अभिलषा से, करते सबको मतवाला, हम पिस पिसकर मरते हैं, तुम छिप छिपकर मुसकाते हो, हाय, हमारी पीड़ा से है क्रीड़ा करती मधुशाला।।१०१। साकी, मर खपकर यदि कोई आगे कर पाया प्याला, पी पाया केवल दो बूंदों से न अधिक तेरी हाला, जीवन भर का, हाय, पिरश्रम लूट लिया दो बूंदों ने, भोले मानव को ठगने के हेतु बनी है मधुशाला।।१०२। जिसने मुझको प्यासा रक्खा बनी रहे वह भी हाला, जिसने जीवन भर दौड़ाया बना रहे वह भी प्याला, मतवालों की जिहवा से हैं कभी निकलते शाप नहीं, दुखी बनाय जिसने मुझको सुखी रहे वह मधुशाला! Bahut kiya raaj angrajo ne, Aaya samay ab hamara hai! Kabir has advocated in his philosophy that life is interplay of two spiritual doctrines, the personal soul Jivatma and God Parmatma. कुछ ऐसे मंझधार हैं, जिनके मिलते नहीं किनारे.

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Top 10 Greatest Hindi Poets of India

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धन्य आज का स्वर्ण-दिवस, नव लोक जागरण, नव संस्कृति आलोक करे जन भारत वितरण! ऑफिस की खिड़की से जब देखा मैने,मौसम की पहली बरसात को…. वन डालियों के बीच से चौंकी अनपहचानी कभी झाँकती हैं वे आँखें, मेरे देश की आँखें, खेतों के पार मेड़ की लीक धारे क्षिति-रेखा को खोजती सूनी कभी ताकती हैं वे आँखें. His died on April 24, 1974. खुले देश के द्वार अचल दीपक समान रहना। - गिरिजाकुमार माथुर Girija Kumar Mathur हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन ओ हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास, हम होंगे कामयाब एक दिन॥ - भारत-दर्शन संकलन Collections प्रो. . छोड़ो। पक्षी उन्हें खांय, तुम्हें पड़ा क्या? भेजती हूँ मैं राखी अपनी, यह लो आज । कई बार जिसको भेजा है सजा-सजाकर नूतन साज ।। लो आओ, भुजदण्ड उठाओ इस राखी में बँध जाओ । भरत - भूमि की रजभूमि को एक बार फिर दिखलाओ ।। - सुभद्रा कुमारी बहिन आज फूली समाती न मन में । तड़ित आज फूली समाती न घन में ।। घटा है न झूली समाती गगन में । लता आज फूली समाती न बन में ।। - रामधारी सिंह दिनकर Ramdhari Singh Dinkar वह प्रदीप जो दीख रहा है झिलमिल दूर नहीं है; थक कर बैठ गये क्या भाई मन्जिल दूर नहीं है। चिंगारी बन गयी लहू की बूंद गिरी जो पग से; चमक रहे पीछे मुड़ देखो चरण-चिह्न जगमग से। बाकी होश तभी तक, जब तक जलता तूर नहीं है; थक कर बैठ गये क्या भाई मन्जिल दूर नहीं है। अपनी हड्डी की मशाल से हृदय चीरते तम का; सारी रात चले तुम दुख झेलते कुलिश का। एक खेय है शेष, किसी विध पार उसे कर जाओ; वह देखो, उस पार चमकता है मन्दिर प्रियतम का। आकर इतना पास फिरे, वह सच्चा शूर नहीं है; थककर बैठ गये क्या भाई! धड़ाम तीनो तोते डर गए तीनो तोते उड़ गए पहला तोता फुर्र दूजा तोता फुर्र तीजा तोता फुर्र फुर्र फुर्र हरी नीम की डाल पर तीन तोते थे मोटे मोठे थे हरे हरे थे 5.

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He was close to prominent nationalists of the time such as Rajendra Prasad, Anugrah Narayan Sinha, Sri Krishna Sinha, Rambriksh Benipuri and Braj Kishore Prasad. However, if someone has really good ones, kindly add them even if they are yours or from some other writers. किसमें कितना दम खम, इसको खूब समझती मधुशाला।।५६। कभी न सुन पड़ता, 'इसने, हा, छू दी मेरी हाला', कभी न कोई कहता, 'उसने जूठा कर डाला प्याला', सभी जाति के लोग यहाँ पर साथ बैठकर पीते हैं, सौ सुधारकों का करती है काम अकेले मधुशाला।।५७। श्रम, संकट, संताप, सभी तुम भूला करते पी हाला, सबक बड़ा तुम सीख चुके यदि सीखा रहना मतवाला, व्यर्थ बने जाते हो हिरजन, तुम तो मधुजन ही अच्छे, ठुकराते हिर मंिदरवाले, पलक बिछाती मधुशाला।।५८। एक तरह से सबका स्वागत करती है साकीबाला, अज्ञ विज्ञ में है क्या अंतर हो जाने पर मतवाला, रंक राव में भेद हुआ है कभी नहीं मदिरालय में, साम्यवाद की प्रथम प्रचारक है यह मेरी मधुशाला।।५९। बार बार मैंने आगे बढ़ आज नहीं माँगी हाला, समझ न लेना इससे मुझको साधारण पीने वाला, हो तो लेने दो ऐ साकी दूर प्रथम संकोचों को, मेरे ही स्वर से फिर सारी गूँज उठेगी मधुशाला।।६०। कल? भारत का दासत्व दासता थी भू-मन की, विकसित आज हुई सीमाएँ जन-जीवन की! रक्त-सिक्त धरणी का हो दु:स्वप्न-समापन, शांति-प्रीति-सुख का भू स्वर्ण उठे सुर मोहन! सावधान रहना खुले देश के द्वार अचल दीपक समान रहना २ प्रथम चरण है नये स्वर्ग का है मंज़िल का छोर इस जन-मंथन से उठ आई पहली रत्न-हिलोर अभी शेष है पूरी होना जीवन-मुक्ता-डोर क्यों कि नहीं मिट पाई दुख की विगत साँवली कोर ले युग की पतवार बने अंबुधि समान रहना। ३ विषम शृंखलाएँ टूटी हैं खुली समस्त दिशाएँ आज प्रभंजन बनकर चलतीं युग-बंदिनी हवाएँ प्रश्नचिह्न बन खड़ी हो गयीं यह सिमटी सीमाएँ आज पुराने सिंहासन की टूट रही प्रतिमाएँ उठता है तूफान, इंदु! इसी पुजारिन को समझो । दान दक्षिणा और निछावर इसी भिखारिन को समझो ॥ मैं उन्मत्त प्रेम की प्यासी हृदय दिखाने आयी हूँ । जो कुछ है, बस यही पास है इसे चढ़ाने आयी हूँ ॥ चरणों पर अर्पित है, इसको चाहो तो स्वीकार करो । यह तो वस्तु तुम्हारी ही है, ठुकरा दो या प्यार करो ॥ - सोहनलाल द्विवेदी Sohanlal Dwivedi हर घर, हर दर, बाहर, भीतर, नीचे ऊपर, हर जगह सुघर, कैसी उजियाली है पग-पग? अरि-मुड़ों का दान, रक्त-तर्पण भर का अभिमान, लड़ने तक महमान, एक पँजी है तीर-कमान! सावधान रहना।। गिरिजाकुमार माथुर १५ अगस्त १९४७ चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण, आज अवतरित हुई चेतना भू पर नूतन! मैं भगवान होता तब न पैसे के लिए यों हाथ फैलाता भिखारी तब न लेकर कोर मुख से श्वान के खाता भिखारी तब न यों परिवीत चिथड़ों में शिशिर से कंपकंपाता तब न मानव दीनता औ' याचना पर थूक जाता तब न धन के गर्व में यों सूझती मस्ती किसी को तब ना अस्मत निर्धनों की सूझती सस्ती किसी को तब न अस्मत निर्धनों की सूझती सस्ती किसी को तब न भाई भाइयों पर इस तरह खंजर उठाता तब न भाई भगनियों का खींचता परिधान होता काश! He got deceased on 30. देख मनहर भइया मुस्करा रही है ना! ।।३।। जै जै हे देशों के स्वामी नामवरों में भी हे नामी । हे प्रणम्य तुझको प्रणमामी जीते रहो हमेश ।। जै जै. . Visiting this site took me back to 1996-97 when I was student of class 9 and 10 in a Hindi medium school.

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Top 8 Greatest Hindi Poets of India

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The wording may not be completely correct above nor is the poem complate Does someone have this complete poem? She passed away in 1987. स्वप्न कल्पना सी सुकुमार सजीली? And I really want that people share their list of wonderful shayaris from Ghalib Urdu Master please. Maa ke kaleje ki kor, aab naa pukariyo…. Madhushala is one of his classics that evokes a kind of enchantment that's rare to feel. नवभारत, फिर चीर युगों का तिमिर आवरण, तरुण अरुण-सा उदित हुआ परिदीप्त कर भुवन! This page presents some of the my favorite hindi poems. .

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Hindi Poems

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दौड़ते फिरते हैं, न जाने क्या पाने को, लगे रहते हैं जुगाड में, परेशान बहुत है! Kadam apne dagmagaane na dena, Kyonki jaane vala yah kala sayaa hai! She was deeply influenced by Buddhism. नव स्वतंत्र भारत हो जगहित ज्योति-जागरण, नवप्रभात में स्वर्ण-स्नात हो भू का प्रांगण! इसपर अधिकार पाओ, वरना लगातार दुख दोगे निरंतर दुख सहोगे! यदि आपको इसमें कोई भी खामी लगे या आप अपना कोई सुझाव देना चाहें तो आप नीचे comment ज़रूर कीजिये. बस इसी का नाम ज़िन्दगी है चलते रहिये, जनाब. स्वर्गीय भावों से भरे ऋषि होम करते थे जहाँ, उन ऋषिगणों से ही हमारा था हुआ उद्भव यहाँ ।। १८ ।। - रामावतार त्यागी Ramavtar Tyagi गूंजी थी मेरी गलियों में, भोले बचपन की किलकारी । छूटी थी मेरी गलियों में, चंचल यौवन की पिचकारी ॥ - रामधारी सिंह दिनकर Ramdhari Singh Dinkar खण्ड तीन - भारत-दर्शन संकलन Collections हम भारतीयों का सदा है, प्राण वन्देमातरम् । हम भूल सकते है नही शुभ तान वन्देमातरम् । । देश के ही अन्नजल से बन सका यह खून है । नाड़ियों में हो रहा संचार वन्देमातरम् । । स्वाधीनता के मंत्र का है सार वन्देमातरम् । हर रोम से हर बार हो उबार वन्देमातरम् ।। घूमती तलवार हो सरपर मेरे परवा नही । दुश्मनो देखो मेरी ललकार वन्देमातरम् ।। धार खूनी खच्चरों की बोथरी हो जायगी । जब करोड़ों की पड़े झंकार वन्देमात रम् ।। टांग दो सूली पै मुझको खाल मेरी खींच लो । दम निकलते तक सुनो हुंकार वन्देमात रम् । । देश से हम को निकालो भेज दो यमलोक को । जीत ले संसार को गुंजार वन्देमात रम् ।। - रीता कौशल आँखें बरबस भर आती हैं, जब मन भूत के गलियारों में विचरता है । सोच उलझ जाती है रिश्तों के ताने-बाने में, एक नासूर सा इस दिल में उतरता है । - सुशांत सुप्रिय बरसों बाद लौटा हूँ अपने बचपन के स्कूल में जहाँ बरसों पुराने किसी क्लास-रूम में से झाँक रहा है स्कूल-बैग उठाए एक जाना-पहचाना बच्चा - द्वारिकाप्रसाद माहेश्वरी उठो धरा के अमर सपूतो पुनः नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नई स्फूर्ति, नव प्राण भरो। - रबीन्द्रनाथ टैगोर Rabindranath Tagore अनसुनी करके तेरी बात न दे जो कोई तेरा साथ तो तुही कसकर अपनी कमर अकेला बढ़ चल आगे रे-- अरे ओ पथिक अभागे रे । - भवानी प्रसाद मिश्र Bhawani Prasad Mishra कलम अपनी साध और मन की बात बिल्कुल ठीक कह एकाध। - भारत-दर्शन संकलन Collections फांसी का झूला झूल गया मर्दाना भगत सिंह । दुनियां को सबक दे गया मस्ताना भगत सिंह ।। फांसी का झूला. .

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Top 8 Greatest Hindi Poets of India

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इसके इलावा आप अपना कोई भी विचार हमसे comment के ज़रिये साँझा करना मत भूलिए. These timeless composition are always going to stay with us. . . वृक्ष रीझ कर किसे करेंगे पहला फल अर्पण-सा? Makhanlal Chaturvedi: He was born on April 4, 1889, in Bavai village of Madhya Pradesh. . .

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Hindi Poems

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It will features 30 eminent and emerging poets including hindi poets from across the world, who will read excerpts of their poems as well as have discussions with the audience. . आज़ादी फिर छीने न अपनी दिया शास्त्री ने नारा, जय-जयकार किसान की अपनी जय जवान हमारा. फूट चुका जब मधु का प्याला, टूट चुकी जब मधुशाला।।१२४। अपने युग में सबको अनुपम ज्ञात हुई अपनी हाला, अपने युग में सबको अदभुत ज्ञात हुआ अपना प्याला, फिर भी वृद्धों से जब पूछा एक यही उज्ञल्तऌार पाया - अब न रहे वे पीनेवाले, अब न रही वह मधुशाला! He left this world on18. Hope to hear from you son.

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Top 10 Veer Ras Poems in Hindi Archives

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The book has three chapters on the past, present and future of India. मिल जुल कर रहे सदा हम, न लड़े, न हो खफा हम, गुस्सा आए, तो उसे हम , माँ जैसी प्यारी, थप्पी कर दें! ।।६।। हिन्दू मुसल्मान ईसाई यश गावें सब भाई-भाई । सब के सब तेरे शैदाई फूलो-फलो स्वदेश ।। जै जै. They have used the poem in a specific style i. अपनी इच्छा शक्ति के बल पर उनको जवाब दे आओ न ………………………. तुम दीप्तिमान रहना। ४ ऊंची हुई मशाल हमारी आगे कठिन डगर है शत्रु हट गया, लेकिन उसकी छायाओं का डर है शोषण से है मृत समाज कमज़ोर हमारा घर है किन्तु आ रहा नई ज़िन्दगी यह विश्वास अमर है जन-गंगा में ज्वार, लहर तुम प्रवहमान रहना पहरुए! जिस ओर उठी अंगुली जग की उस ओर मुड़ी गति भी पग की जग के अंचल से बंधा हुआ खिंचता आया तो क्या आया? There are 703 verses in all. . It was today, in 2003, that Harivansh Rai Bachchan breathed his last, leaving behind his words that mesmerize us till date.

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